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फरवरी में हजारों युवक लेंगे नशा न करने का संकल्‍प

लखनऊ | 14 फरवरी को होने वाला तृतीय नशा मुक्त समाज आंदोलन का संकल्प समारोह 22 फरवरी के बाद किया जाएगा कृपया और लोगों को भी सूचित करने का कष्ट करे। नशा मुक्त समाज अभियान कौशल का के अंतर्गत साउथ सिटी एल. पी. एस. ग्राउंड रायबरेली रोड में होने वाले तृतीय संकल्प समारोह अपरिहार्य कारणों की वजह से कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है जिसकी तिथि की सूचना आप सभी को आज शाम तक उपलब्ध करा दी जाएगी। सांसद कौशल किशोर

मेरे पापा



मासूम मुस्कान और निश्छल आंखों में उठते हजारों अनकहे प्रश्न और उन सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर वो भी इशारे से पापा ऊपर सो रहे हैं

जी हां दो साल का मासूम कृष्णा अपनी तोतली आवाज से अपने पूरे घर को सर पर उठा कर रखता .. हर गाड़ी का खिलौना उसे चाहिए जो उसे हकीकत में दिखाई देती है बड़ी से लेकर छोटी गाड़ी पर ज्यादा देर नहीं थोड़ी देर बाद उन्हें तोड़ने का भी प्रयास करता। अपनी मां और पिता की आंखों का तारा ही नहीं बल्कि पूरे संयुक्त परिवार की आंखों का तारा कृष्णा ........

नियति कहें, समय का कुचक्र कहे , नशे की मार या युवा शाइस्तगी का अभाव *

जिस बच्चे को अभी अपनों की पहचान भी सही ढंग से नहीं हुई थी उसे अपने सबसे प्रिय अपने डैडी को हमेशा के लिए अलविदा कहना पड़ा।

काश आज कल के नवयुवक रिश्तो, भावनाओं और संवेदनाओं के प्रति गंभीर हो सकते हैं। उन्हें पता होता कि उनका हर एक कदम उनकी आने वाली पीढ़ी के लिए कितना कीमती है उनके द्वारा लिया गया एक कश, उनके द्वारा पी गई एक शराब की बोतल, उनके द्वारा किया गया नशे का हर वह पहला घूंट उनके पूरे परिवार को दुख के अथाह सागर में डूबने के लिए काफी होगा ।
सब कुछ तहस-नहस करने के लिए एक गलत कदम, युवा पीढ़ी द्वारा चुना गया एक गलत रास्ता लाख आत्मानिग्रही होने के वावजूद सबके दिलों को तार-तार करने के लिए काफी होगा।
शादी के दो साल बाद जब नन्हे फरिश्ते के रूप में कृष्णा का जन्म हुआ तो पूरे परिवार में हर्षोल्लास था। शादी के 5 साल पहले जो पिता नशे का आदी हो गया था उसने भी सच्चे मन से हृदय में असीम स्नेह भरकर कसम खाई नशे की गहरी खाई की तरफ कभी भूल कर भी नहीं देखेंगा, क्योंकि अब सबके दिलों का चहेता ,सबकी आंखों का नूर और सब के सारे दर्दों को भुला देने की दवा कृष्णा आ गया था। बच्चे का नामकरण हुआ और वह भी बहुत प्यारा कृष्णा सबका उद्धार करने वाला।।
कृष्णा के लालन-पालन सुख सुविधाओं और दुलार में किसी प्रकार की कोई कमी न थी। आकाश भी प्यारी सी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ बहुत ही उत्साह और नई उमंग के साथ जिंदगी जी रहा था। बिना चांदी की डोर और सोने के पालने फिर भी अपने मासूम बच्चे को हमेशा बाहों का झूला झुलाने वाले प्यार देने वाले बंधन को निभाना आकाश की सबसे बड़ी तमन्ना थी।
फिर ऐसा क्या हुआ कि नशे को हमेशा के लिए शपथ अलविदा करने वाला पिता मजबूर हुआ पुनः नशे में प्रवेश करने के लिए, देखते ही देखते हैं प्यार दुलार और सम्मान की मजबूत दोस्त से बंधा मजबूत परिवार आकाश को नशे से कम प्रिय लगने लगा, सारे के सारे प्यार मोहब्बत के रिश्ते बेईमानी लगने लगे। खुशहाल परिवार में उन सब की धुरी आकाश को यह समझ में आना बंद हो गया कि अब उसका जीवन उसकी पत्नी और उसके बच्चे का है जो कल को अपने भविष्य के लिए उसके कंधे का सहारा लेने को बाहें फैलाए खड़ा हुआ है।
वाकई जीवन में सही गलत का निर्णय ले पाना कठिन होता है जीवन में किया गया एक गलत फैसला पूरे रास्ते, पूरे व्यक्तित्व ,पूरे परिवार ,पूरे समाज और पूरे देश के भविष्य को बर्बाद कर देता है आकाश के साथ भी यही हुआ नशा मुक्ति केंद्र में रहने के बाद वहां ही बने दोस्त जो कि नशे से मुक्त होकर आए थे अपने समाज में आते ही फिर इस काले नशे रूपी अजगर के चक्रव्यूह में फंस गए और गाहे-बगाहे नशा करने लगे जिसका खामियाजा दोस्ती और संकोच के कारण आकाश को भी भुगतना पड़ा ।ऐसे प्यारे दोस्त कहें या पुराने जन्मों के पाप रूपी दोस्त जो भीड़ में से सामने निकल आए और बहुत ही प्यार स्नेह और दुलार के साथ शराब की लत को जो कि नशा मुक्ति केंद्र में छूट चुकी थी परिवार के अनुशासन और प्रेम में नशे की लत टूट चुकी थी उसे फिर से पोषित, सिंचित और जीवित करने में लग गए.........
क्योंकि प्यार, सम्मान और परिवार की निगरानी इतनी ज्यादा थी कि खुलेआम यह सब नहीं हो सकता था तो अन्य तरीकों से नशे की सप्लाई दुश्मनों जो कि दोस्त के रूप में थे, द्वारा होती रही।
परिवार को तब पता चला जब शरीर साथ देना छोड़ दिया, खून की उल्टियां होने लगी और जिन आंखों में भविष्य का सपना होना था वहां अंधकार पैर पसारने लगा।जन्म देने वाली माता जिसने न जाने कितने पत्थरों को पूछ कर अपने सहृदय पुत्र को प्राप्त किया था शुद्ध शाकाहारी और अपने किसी भी कृत्य व आचरण से किसी को दुख ना पहुंचाने वाली मां अपने बेटे की इन मूर्तियों को रोकने तथा पूर्ण उसके सलामती के लिए वह सब करने को तैयार थी जिससे उसका जीवन बचाया जा सके और शायद कुछ और मंजूर था घंटों नहर के किनारे खड़े रहकर रोहू मछली को पकड़कर एक डॉक्टर द्वारा बताई गई विधि से खिलाने से शराब की लत छूट जाएगी ऐसा भी प्रयास करने वाली शुद्ध शाकाहारी भी हार रही थी।
लेकिन जीवन को वापस मुड़कर इस बिगड़े हुए सफर से वापस लौटकर पकड़ पाना बड़ा मुश्किल था। निश्चित रूप से आप कहेंगे इस संसार में बहुत से लोग नशा करते हैं सब को मृत्यु प्राप्त नहीं होती पर यह एक ऐसा परिवार था जहां कोई नशा नहीं करना .....ना जाने कितनी रिश्तेदारी है इसीलिए छूट गई कि नशे की पार्टी में परिवार शरीक नहीं होता था। इसे कलयुग की विडंबना करें या पुराने जन्मो का कर्ज...... नशे रूपी बवंडर में फंसे हुए बेटे को ना बचा पाने की विवशता.........
माता और पिता के और भी पुत्र थे पर उस मासूम कृष्णा का क्या जिसका सिर्फ एक ही पिता था। जिसे अक्सर गोद में उठाया उसका पिता मतवाले हीरोइन की तरह इधर-उधर घुमा करता था जिसके सीने से लगकर मां की फटकार को कृष्णा रो कर भुला दिया करता था। उसे तो पता ही नहीं कि उसने क्या खो दिया था।
जीनिक रूप से आकाश का शरीर इतना मजबूर ना था कि नशे के इस दुष्प्रभाव जवाब को झेल सकता.... Liver cirrhosis की चपेट में।
परिवार के मुखिया पिता ,रिश्तेदारों और उन सब में स्नेहिल जन्म दात्री माता कीप्रार्थना, हर प्रकार के अनुरोध प्यार ,स्नेह कोई भुला दिया, जीवन के सबसे खूबसूरत बंधन में बांधने वाली पत्नी के त्याग और बलिदान, दूध मुहे मासूम जिसने अभी जीवनके सुनहरे कपोलो को ढंग से देखा भी नहीं था की मनोहारी मुस्कान और खुशी हो या गम पिता की तरफ़ सहारा खोजता बालमन, यह सब भी आकाश को ना रोक पाए
जब तक आकाश को समझ में आया कि उसे कहां रुकना है कहां मुड़ना है और किसके लिए जीना है तब तक बहुत देर हो चुकी थी जीवन और इस शरीर की बाजी हाथ से निकल चुकी थी अब लाख कोशिश कर लो ,लाख ईश्वर से प्रार्थना करो, ईश्वर को पूज लो, कुछ नहीं हो सकता था शराब के नशे रूपी इस काले दानव ने सब कुछ बर्बाद करने की ठान ली और अक्टूबर के महीने का वह दिन भी आ गया जब सब से बात करते-करते आंखों में जीवन की लालसा लिए, पत्नी का मुंह देखते हुए भाइयों का प्यार समझते हुए आकाश की आंखें जीने की लालसा लिए बंद हो गई।
वो पिता जो सुबह की पहली किरण से उठकर उन सभी दुखी दीनोऔर मदद की दरकार लिए ,किसी भी मुसीबत में फंसे हुए लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है उसे इसका होश नहीं रहता कि उसने क्या खाया, क्या पिया और क्या पहना, जो उस हर अंतिम व्यक्ति के दुख, तकलीफ और गम में उसके साथ खड़ा रहता आज उस पिता के जीवन में ही एक ऐसा अंधकार छा गया जिसे यकीनन सह पाना बहुत ही मुश्किल था। आज अगर एक खेलता खाता शुद्ध विचारों वाला ,शुद्ध शाकाहारी, किसी नशे की लत से कोसों दूरऔर अपने विषम परिस्थितियों में परिवार की गाड़ी को लेकर आगे बढ़कर सफलता की पराकाष्ठा को तय करने वाला पिता टूट रहा था । वह भी शायद अपने बच्चे की अनकही वेदना से जो उसकी आंखों में जाते जाते हैं देखी वह जीना चाहता था पर शायद जीवन रूपी घड़ियां उसके लिए खत्म हो चुकी थी। लाख चाहने के बाद भी पिता अपने बच्चे को जीवन ना दे सका।
सब की दुख तकलीफों को हरने वाला आज खुद इतना खोखला और टूट गया था शायद आगे के रास्ते अंधकार मय दिख रहे थे इसलिए नहीं कि सबसे प्रिय पुत्र चला गया, इसलिए कि अब वह अपने पुत्र की अर्धांगिनी अपनी बहू तथा अपने दूधमुए दो साल के कृष्णा को क्या कहकर बताएं कि वैवाहिक जीवन केचार साल ही हुए थे जिस साथी के बदौलत अपना घर बार छोड़कर प्यारी सी गुड़िया को अपने घर लाए थे उसे क्या कह कर दिलासा दें कि उनका बेटा कब आएगा।
निश्चित रूप से सब अपने अपने जीवन में समय के साथ एडजस्ट हो सकते हैं पर क्या कभी देखी है उस कृष्णा की आंखें जिसने अभी अपने पिता को ढंग से पहचाना भी अपना था ........जब उससे यह प्रश्न किया जाता है कि डैडी कहां है तो हाथ से इशारा कर घर के ऊपर वाले कमरे को बताता है कि डैडी सो रहे हैं......... पर उसके डैडी कब तक सोते रहेंगे क्या फिर कभी अपने डैडी से माथे में और गालों में किए हुए चुम्बन स्पर्श को कृष्णा महसूस कर पाएगा?इतने प्यार से गालोको सहलाने वाले हाथ उस स्पर्श को कभी नन्ना कृष्णा महसूस कर पाएगा। निश्चित रूप से नहीं..........
कोरी और मासूम आंखें शायद उस व्यक्ति को खोजना चाहती थी जो हर रात उसे बहुत ही प्यार से थपकी देकर सुलाता था। मजाल है किबुरी हवा भी कृष्णा को छू जाए ,उसके पिता व्याकुल होकर हर वह उपाय करने की कोशिश करते थे कि कृष्णा को कोई दिक्कत नहो... और आज वही पिता अपने नाजो, दुलारो के बालक को मुसीबतों ,अनचाहे प्रश्न और भावनाओं के सूने समंदर को देकर नशे की कलुषित दुनिया में विलीन हो गए।
युक्त परिवार होने की वजह से शायद कृष्णा आज उन सभी पुरुषों जो उसके पिता की तरह दिखते हैं वहअपने बाबा चाचा और ताऊ को पापा और डैडी कहकर संबोधित करता।
शायद उस अबोधबालक को नहीं पता कि ऊपर वाले कमरे में कोई नहीं है ,शायद उस अबोध को नहीं पता कि जिस बाबा की पीठ में वह झूला झूल रहा है वह अंदर से कितना टूटे हुए हैं शायद उस बालक को नहीं पता कि उसकी जो सोलह सिंगार की हुईं नई नवेली गुड़िया की तरह सज संवर कर बैठीरहने वाली मां, आज सुनी मांग और सूनी आंखे लिए हुए दरवाजे की ओर निहार रही है कि शायद कहीं से आकाश वापस आएगा और उसका उजड़ा हुआ संसार फिर से बस जाएं........ काश ईश्वर कोई चमत्कार कर सकते।
हां नशे की लत से उत्पन्न हुए इस महा बवंडर के दर्द को महसूस कर पाना या बयान कर पाना असंभव है पर आप ही सोचिए क्या कभी उस मासूम कृष्णा को अपने सभी प्रश्नों का उत्तर मिल पाएगा? निश्चित रूप से नहीं।
इसीलिए इस कहानी में भावनाएं ,संवेदनाएं और नैसर्गिक दर्द होने के बावजूद भी सबसे बड़ी सीख है कि एक कृष्णा तो हम देख रहे हैं अब दूसरा कृष्णा इस दर्द के साथ कभी ना मिले किसी पिता को अपने पुत्र को ना खोना पड़े और किसी पुत्र रूपी कृष्णा को अपने पिता को.........
जी हां सही पहचाना मैं बात कर रही हूं मोहनलालगंज सांसद कौशल किशोर के पुत्र आकाश किशोर उर्फ जेबी के उस मासूम बच्चे कृष्णा की जिसे शायद पता ही नहीं कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं है।
बाबा दादी की आंखों का तारा , ताऊ और ताई के दिल में हमेशा छाए रहने वाला आराध्या का सबसे प्रिय भाई और अक्सर दो नामों को लेने वाला डैडी, पापा या फिर आशु.......... को इस नशे ने अपने सबसे प्रिय रिश्ते को खोने के लिए मजबूर कर दिया।
सफेद टेडी बेयर को अपने कंधों पर लेकर बाल सुलभ क्रीड़ा करते हुए कृष्णा अक्सर कहता है यह मेरा अशू है इसे सुला रहा हूं, टीवी पर पुलिस की गाड़ी आता देख बाबा के कंधों पर चोर और पुलिस का खेल खेलने का दबाव डालने वाला मासूम अपनी बालसुलभ क्रीड़ाओं से सबको हंसाने और एक डोर में बांधने का आसान जरिया है। कभी घोड़ा बन अपने बाबा को कहता बाबा बैठो ...... तो कभी बाबा के मुंह से अनायास ही निकल जाता बड़ा शैतान है बड़ा शैतान है बड़ा नौटंकीबाज है और दिन भर की थकान मासूम कृष्णा की एक मुस्कान के साथ कोसों दूर भाग जाती..................
वाकई किसी भी युवा के लिए शायद अपने जन्म देने वाली मां को भुला देना आसान है शायद अपने पालन पोषण करने वाले पिता को भुला देना आसान है अपने साथ जीवन के सबसे सुनहरे दिन बिता देने वाली पत्नी को भुला देना आसान है पर नशे में ऐसा क्या होता है जिस की लत ने मासूम प्रकृति के सबसे मनमोहक बाल रूप, खूबसूरत भेट कृष्णा की किलकारियां, कृष्णा की मासूम बाल सुलभ क्रीड़ाओं, और मनोहर करती भोली अदाओं को भी बुला दिया।
निश्चित रूप से परिस्थितियां विषम थी और इन विषम परिस्थितियों में एक दूरदर्शी पिता एक दृढ़ प्रतिज्ञ व्यक्ति ने निश्चय किया कि मेरा बेटा नशे की बलि चढ़ा है पर है ईश्वर अब किसी और के पिता को ऐसे दिन ना देखने पड़े, किसी और के मासूम बच्चे को अपने पिता से महरूम ना होना पड़े, किसी और की बेटी और बहू को जमीन में पड़े हुए मृत शरीर से लिपट कर विव्हल हो रोना ना पड़े।
उन सभी युवाओं को विचार करना चाहिए ...आपने तो अपना जीवन अपने पिता के कंधे पर और उसकी गोद में झूला झूल कर और उसकी उंगलियों को पकड़ , चलकर बिता दिया पर आपने क्यों नशे की लत मेंआगे बढ़ते हुए उस मासूम की भावनाओं को कुचल दिया जो इन सभी क्रियाओं के लिए आपका इंतजार कर रहा था।
जागे सचेत हो जाएं और अपनों को भी सचेत करें फिर कोई मासूम कृष्णा ना चाहते हुए भी हजारों प्रश्नों को आप से पूछने के लिए मजबूर ना हो..................... फिर किसी पिता को अपने दिल पर पत्थर रखकर रोज नित प्रति अपने पुत्र के तस्वीर पर फूल चढ़ाते हुए दो आंसू ना गिराने पड़े। समाज की सबसे बड़ी विडंबना और कुरीति नशे से मुक्ति मिल सके दिल में गम के गहरे कुएं होने के बाद भी समाज को सीख देने के लिए फिर किसी कौशल किशोर को उठकर खड़ा ना होना पड़े। सोचे समझे और मनन करें आग्रह है उन सभी युवाओं से जो अभी तक नशे के चंगुल में नहीं फंसे, जो अभी तक छल प्रपंची दोस्तों के शिकंजे में नहीं आए और जो अभी तक अपने परिवारों से दूर नहीं हुए ।।
जागो मनन करो अपने मन के किसी कोने में बसे मासूम कृष्णा को देखो जो ताउम्र खामोश नहीं रहेगा।
यह एक दृढ़ संकल्प पिता का संकल्प हो सकती है ,सकारात्मक सोच का नतीजा हो सकता है कि संकल्प के साथ एक मुहिम शुरू हुई समाज को नशा मुक्त बनाना की और नाम दिया
अभियान कौशल का नशा मुक्त समाज।
अभियान कौशल का.…... नशा मुक्त समाज बनाना है उस नौजवान को इस अभियान से जोड़े जो नशा नहीं करता। ताकि फिर कोई कृष्णा मासूम और गंगाजल सी शुद्ध आंखों से समाज से प्रश्न न करें 🙏 🙏 🙏



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जनपद लखनऊ के नगर पंचायत बक्शी का तालाब के चेयरमैन अरुण सिंह गप्पू के यहां जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी योगेश शुक्ला संजय सिंह हर दत्त सिंह इंद्रपाल सिंह कामता प्रसाद रावत के नेतृत्व में नशा मुक्त समाज आंदोलन अभियान कौशल का के लिए लोगों ने चेकों के माध्यम से आर्थिक सहयोग किया

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सांसद कौशल किशोर की अगुवाई में हजारों युवकों ने लिया नशा न करने का संकल्प



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सांसद मा0 कौशल किशोर जी के आवाहन पर विधानसभा क्षेत्र सिधौली में प्रभात किशोर जैकी भाई के नेतृत्व में निकाली गई नशा मुक्त होली पदयात्रा।

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आज आर. डी. एम. एल. ब्रिलिएंट अकैडमी माटीपुर कठिगरा काकोरी में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को एवं अभिभावक व अन्य स्कूल के प्रबंधकों को संबोधित किया व सभी को अपनी जिंदगी में नशा न करने का संकल्प कराया साथ में एम एल सी अवनीश कुमार सिंह जी, मलिहाबाद ब्लाक प्रमुख के प्रतिनिधि अनिल सिंह जी एवं विद्यालय के स्टाफ के लोग उपस्थित रहे। #नशेकोनखुशियोंकोहां

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जग को जीवन देने वाली, मौत भी तुझसे हारी है, कोमल है तू कमजोर नहीं, शक्ति का नाम ही नारी है। महिलाओं के अदम्य साहस, सम्मान, समानता, सुरक्षा, सहभागिता और सशक्तीकरण के लिये समर्पित "अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस" के अवसर पर समस्त नारी शक्ति को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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आज #अंतर्राष्ट्रीय_महिला_दिवस के अवसर पर एमिटी यूनिवर्सिटी की तीन प्रोफेसर डॉक्टर शैलजा दीक्षित जी, डॉ अर्चना शर्मा जी, डॉक्टर सना जी व समाजसेवी अनुराग दीक्षित जी का मेरे आवास पर आगमन हुआ मैंने सभी का स्वागत किया। सभी प्रोफेसर व अनुराग दीक्षित जी ने संकल्प लिया कि आने वाले समय में नई पीढ़ी के बच्चों को नशे से बचाने का संकल्प कराएंगे। नई पीढ़ी के लड़के और लड़कियां नशे से दूर रहेंगे तभी महिला सशक्तिकरण सबसे ज्यादा सशक्त होगा। #internationalwomensday2021

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श्री संस्कार वाटिका न्यास के सहयोग से 5 मार्च दोपहर 2:00 बजे गालिब इंस्टीट्यूट दिल्ली में लगभग 200 युवकों व युवतियों को नशामुक्त जीवन का संकल्प दिलाने का कार्य किया गया जो अपने जीवन में कभी भी नशा नहीं करेंगे। कार्यक्रम संयोजक उत्कर्ष शर्मा छात्र नेता दिल्ली विश्वविद्यालय, एनसीआर दिल्ली के प्रभारी के रूप में नमिता नमन जी, संचालक के रूप में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संस्कार वाटिका न्यास अभिनव शर्मा जी (जाकिर हुसैन कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष) ऋषि राज सिंह जी ,महेंद्र रजक जी,अनिल बाजपेई जी (विधायक गांधीनगर) ,कवि राहुल जैन जी, संतोष पासवान जी , मोहम्मद इकबाल जी और सुल्तानपुर से शुभम पांडे जी, अरून सिंह जी व युवा साथी उपस्थित रहे।

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यूपी प्रेस क्लब में सनातन महासभा एवं लाल ब्रिगेड द्वारा नशा एवं अपराध मुक्त समाज बनाने को लेकर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुआ और उपस्थित लोगों को संबोधित किया व नशामुक्त एवं अपराधमुक्त समाज बनाने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।



मेरी मृत्यु क्यों



मेरे मम्मी पापा ने मुझे बड़ी हसरत से बहुत दुख झेल कर पाला था बड़ा किया था। पढ़ाने का भी प्रयास किया मगर इंटर तक ही शिक्षा ग्रहण कर पाया। मैं जो कुछ भी करता था मेरे मम्मी पापा सब कुछ मानते थे। मेरे पास किसी चीज की कमी नहीं थी। मम्मी पापा मेरे भाई मेरे परिवार के लोग चाचा और बड़े बाबू, छोटे बाबू, मेरे चचेरे भाई-बहन मुझे बहुत चाहते थे। मेरी बहुत चिंता करते थे। मैं बगैर बताए कहीं भी चला जाता था जब तक नहीं आ जाता था तब तक पता लगाते रहते थे। मम्मी-पापा ने मेरी शादी बहुत धूमधाम से की। मेरी शादी में इतने ज्यादा लोगों को आमंत्रित किया गया कि लगभग 40-50 हजार लोग प्रीतिभोज में सम्मिलित हुए। सबने मुझे सुखी रहने का और मेरी पत्नी को सौभाग्यवती होने का बेहतर जिंदगी एक नई जिंदगी जीने का आशीर्वाद दिया। लेकिन मैं आज नहीं हूं, मैं स्वर्गीय हो गया हूं, मेरी पत्नी अब सौभाग्यवती नहीं रही विधवा हो गई है। मेरे मम्मी-पापा मेरे सभी भाई एवं सभी परिवार के सदस्य मेरे न रहने पर तड़प रहे हैं। इस सब का दोषी मैं हूं। मम्मी-पापा का पूरे परिवार का सब कुछ कहना मैंने माना लेकिन एक कहना नहीं माना, मैं चोरी छुपे शराब पीता रहा जिससे मेरा लीवर कमजोर हो गया। मेरे शरीर की छमता शराब पीने लायक नहीं थी। मैने फिर से शराब पीना शुरु कर दिया। इस बीच मेरे पापा करोना पॉजिटिव हो गए। इसके लिए पापा को दो बार अस्‍पताल में भर्ती होना पड़ा। मेरे पापा को मौत के मुंह से निकल कर एक नई जिंदगी मिली। मगर मैं इस बीच शराब फिर से पीने लगा, जो मेरे लिए जहर थी। मेरे घरवाले जान नहीं पाते थे। कुछ लोगों को फोन करके मैं शराब मंगा लेता था, और चोरी-छिपे पी लेता था। नतीजा यह निकला कि मुझे फिर से ज्वाइंडिस हो गया। मैंने अपने पापा को बताया। पापा ने डॉक्टर से बात करके मेरा करोना टेस्ट कराया। शनिवार 17 अक्टूबर 2020 को सुबह मुझे खून की उल्टी हुई। मैंने पापा से बताया पापा ने मेरे भाइयों को तत्काल शताब्दी हॉस्पिटल में भेज कर मुझे भर्ती कराया। मेरे पेट में ब्लीडिंग हो रही थी। डॉक्टर साहब ने एंडोस्कोपी करके मेरा बहता हुआ खून बंद किया। खून की बहुत कमी आ गई थी। मेरे भाई मेरे मित्रों ने खून देकर मुझे बचाने का प्रयास किया। डॉक्टरों के लाख प्रयास करने पर भी मैं अपनी पत्नी अपने भाइयों और दोस्तों से बात करते अचानक मेरी आंखें बंद हुई और मैं इस दुनिया में नहीं रहा। मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि मैं शराब पीने से मर जाऊंगा। क्योंकि बहुत लोग शराब पीते हैं, उनको कुछ नहीं होता लेकिन मेरी शराब से मौत हो गई। इसका कारण यह है कि मेरा शरीर नशा झेलने की क्षमता में नहीं था, क्योंकि मेरे मम्मी-पापा किसी भी प्रकार का नशा नहीं करते हैं। मैं उन्हीं की संतान था, इसलिए नशा करने के लिए मेरा शरीर सहने की स्थिति में नहीं था। मैंने अपने मम्मी-पापा और भाइयों का कहना नहीं माना और आज मैं इस दुनिया में नहीं हूं। मेरा 2 साल का बेटा कृष्णा जीसे कुछ भी नहीं मालूम कि पापा कहां चले गए वह बगैर बाप का हो गया मेरी पत्नी विधवा हो गई। मेरे मम्मी पापा इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। आज मेरे चार भाई की जगह केवल तीन भाई बचे हैं। यदि मैं शराब नहीं पीता होता तो मैं आपके बीच होता। आज मेरी शोकसभा नहीं हो रही होती, जो मेरे लिए शोक हो रहा है यह नहीं होता। मैंने बहुत बड़ी गलती की है। लेकिन यह गलती अब वापस नहीं हो सकती। इसलिए मैं सभी से हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए विनती करता हूं कि यदि आप किसी प्रकार का नशा करते हैं तो उसे छोड़ दें। अपने बच्चे को नशे से दूर रखें। जो लोग दूसरों को नशा कराते हैं उन से अनुरोध है कि ऐसा न करें। किसी के जीवन से न खेलें नशा केवल घर ही नहीं बर्बाद करता बल्‍कि नशा करने वाले व्यक्ति को ही बर्बाद कर देता है। पूरे परिवार को बर्बादी की दहलीज पर लाकर खड़ा कर देता है। मैं इस गलती को स्वीकार करता हूं, मेरी तो मौत हो गई अब मैं वापस नहीं आ सकता लेकिन नशे के कारण किसी और की मौत न हो इसके लिए आप शराब पर रोक लगा सकते हैं, जो लोग शराब पीते हैं उनको शराब पीने से रोक सकते हैं। आप सब को यह काम मेरी मौत से सबक लेकर करना चाहिए। नशे की लत बहुत खराब होती है यह दिमाग को कमजोर कर देता है। जो मना करता है उसकी बात बुरी लगती है। समाज में प्रतिष्ठा बचाने के लिए नशा करने वाला आदमी झूठ बोलता है, मैंने भी यही किया मम्मी-पापा को धोखा दिया। भाइयों को धोखा दिया झूठ बोला काश मैं उनकी बात मान लेता तो आज मैं आपके बीच में होता। मेरा बेटा बगैर बाप का नहीं होता, मेरी पत्नी विधवा नहीं होती। मेरे मम्मी-पापा मेरे भाई-बहन मेरे परिवार के लोग आज तड़पते नहीं। मुझे माफ करना मैं जानता हूं कि आप लोग मेरे लिए शोक कर रहे हैं, दुख प्रकट कर रहे हैं, मेरी आत्मा को शांति आपके शांति पाठ से आपके शोक सभा से कुछ अंश तक जरूर मिलेगी, लेकिन मेरी आत्मा को पूर्ण शांति तभी मिलेगी जब आप एक आंदोलन चलाकर नशे को पूरी तरह से बंद करेंगे, और नशे के द्वारा किसी की भविष्य में मौत नहीं होने देंगे। जब यह आप करेंगे तभी मेरी आत्मा को शांति मिलेगी।